मुजफ्फरनगर: "लावारिसों की वारिस" शालू सैनी ने फिर पेश की इंसानियत की मिसाल, अज्ञात शव को भाई मानकर दी अंतिम विदाई
थाना फुगाना क्षेत्र में मिला था अज्ञात शव; अब तक 6000 से अधिक बेसहारा शवों का अंतिम संस्कार कर चुकी हैं समाजसेवी शालू सैनी
मुजफ्फरनगर। जहाँ आज के दौर में स्वार्थ के चलते लोग अपनों से मुँह मोड़ लेते हैं, वहीं जनपद की बेटी और "लावारिसों की वारिस" के नाम से विख्यात समाजसेवी शालू सैनी मानवता की एक नई इबारत लिख रही हैं। एक बार फिर शालू सैनी ने एक अज्ञात शव का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कर यह सिद्ध कर दिया कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं है। फुगाना थाना क्षेत्र में मिले एक लावारिस शव को अपना भाई मानते हुए शालू ने पूरे विधि-विधान के साथ श्मशान घाट पर उसे मुखाग्नि दी, जिसे देख वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
जानकारी के अनुसार, पुलिस को फुगाना क्षेत्र में एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने की सूचना प्राप्त हुई थी। शिनाख्त न हो पाने के कारण जब शव लावारिस घोषित कर दिया गया, तब पुलिस ने शालू सैनी से संपर्क किया। सूचना मिलते ही शालू मौके पर पहुंचीं और मानवता का फर्ज निभाते हुए शव को अपने संरक्षण में लिया। उन्होंने कहा, "मेरा प्रयास है कि इस दुनिया से कोई भी इंसान बेनाम और बेसहारा होकर न जाए। जब तक मेरी सांसें हैं, मैं लावारिसों की सेवा का यह कार्य जारी रखूंगी।"
6000 से अधिक शवों का कर चुकी हैं संस्कार शालू सैनी का सेवा भाव किसी एक धर्म तक सीमित नहीं है। वे पिछले कई वर्षों से हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई, सभी धर्मों के लावारिस शवों का उनके धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार करती आ रही हैं। अब तक वे लगभग 6000 से अधिक अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन संपन्न कर चुकी हैं। उनके इस निस्वार्थ सेवा कार्य की न केवल मुजफ्फरनगर, बल्कि पूरे देश में सराहना हो रही है।
ये भी पढ़ें "दुनिया किस दिशा में जाएगी, यह तय करेगा इंसान का फैसला" AI पर पीएम नरेंद्र मोदी का बड़ा बयानप्रशासन और जनता ने सराहा शालू सैनी के इस हौसले और संवेदनशीलता की पुलिस प्रशासन ने भी प्रशंसा की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शालू सैनी जैसे लोग ही समाज में इंसानियत को जीवित रखे हुए हैं। शालू ने आमजन से भी अपील की है कि वे इस पुनीत कार्य में सहयोग करें ताकि किसी भी मृतक की विदाई बेनाम न हो। उनके इस अटूट संकल्प ने मुजफ्फरनगर का नाम सेवा और समर्पण के क्षेत्र में पूरे प्रदेश में ऊँचा किया है।
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बिजेंद्र सैनी वर्ष 1993 से निरंतर रॉयल बुलेटिन परिवार का एक अभिन्न हिस्सा हैं। तीन दशकों से अधिक के अपने गौरवशाली सफर में उन्होंने संस्थान को तकनीकी और संपादकीय, दोनों मोर्चों पर मजबूती दी है।
वर्तमान में वह कंप्यूटर विभाग के वरिष्ठ प्रमुख (Senior In-charge) के रूप में तकनीकी कमान संभालने के साथ-साथ संपादकीय टीम (Editorial Team) के एक महत्वपूर्ण सदस्य हैं। तकनीकी विशेषज्ञता और अनुभवी लेखनी के अनूठे संगम के साथ बिजेंद्र सैनी रॉयल बुलेटिन की विश्वसनीयता और प्रगति में निरंतर अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं।

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