एमपी में आशा कार्यकर्ताओं और संविदा कर्मचारियों के लिए नया नियम लागू अब बायोमेट्रिक से मिलेगा मानदेय

मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है जो हजारों आशा कार्यकर्ताओं और संविदा कर्मचारियों के जीवन को प्रभावित करने वाली है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने मानदेय भुगतान की पूरी व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है. अब प्रदेश में काम कर रहे कर्मचारियों को अपना भुगतान पाने के लिए नई प्रक्रिया से गुजरना होगा. सरकार का कहना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जी उपस्थिति जैसी समस्याओं पर पूरी तरह रोक लगेगी. इस फैसले के बाद पूरे प्रदेश में कर्मचारियों के बीच नई व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है.
अब बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के बाद ही मिलेगा मानदेय
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्यप्रदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि अब संविदा कर्मचारियों आशा कार्यकर्ताओं और आशा पर्यवेक्षकों को अपना मानदेय पाने के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण करना अनिवार्य होगा. इसका मतलब यह है कि कर्मचारियों को अपना अंगूठा लगाकर बायोमेट्रिक सत्यापन कराना होगा. जब यह सत्यापन पूरा हो जाएगा तभी उनके भुगतान का विवरण कोषालय तक भेजा जाएगा.
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25 मार्च तक पूरा करना होगा पंजीकरण
एनएचएम ने सभी जिलों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी संविदा कर्मचारी आशा कार्यकर्ता और आशा पर्यवेक्षक अपना पंजीकरण समय पर पूरा कर लें. इसके लिए अंतिम तारीख 25 मार्च 2026 तय की गई है.
ये भी पढ़ें मुरादाबाद: गैस एजेंसी पर प्रशासन का 'सर्जिकल स्ट्राइक', अनियमितताओं पर भारत गैस का गोदाम सीलयदि कोई कर्मचारी तय समय तक पंजीकरण नहीं कराता है तो उसे भुगतान में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए विभाग ने सभी जिलों में अधिकारियों को जिम्मेदारी दी है कि वे कर्मचारियों को जागरूक करें और पंजीकरण प्रक्रिया समय पर पूरी करवाएं.
एसएनए स्पर्श पोर्टल पर करना होगा पंजीकरण
नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को एसएनए स्पर्श पोर्टल पर जाकर अपना बायोमेट्रिक पंजीकरण कराना होगा. इसके लिए एक विशेष आधार गेटवे एप्लीकेशन भी तैयार की गई है जिसके माध्यम से कर्मचारियों का प्रमाणीकरण किया जाएगा.
स्वास्थ्य विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने क्षेत्रों में शिविर लगाकर या अन्य माध्यमों से कर्मचारियों का पंजीकरण कराएं. इसका उद्देश्य यह है कि कोई भी कर्मचारी इस प्रक्रिया से वंचित न रह जाए और अप्रैल से शुरू होने वाली नई भुगतान प्रणाली में किसी तरह की बाधा न आए.
प्रदेश में बड़ी संख्या में काम कर रहे हैं कर्मचारी
मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बड़ी संख्या में कर्मचारी काम कर रहे हैं. जानकारी के अनुसार प्रदेश में लगभग 80 हजार आशा कार्यकर्ता सक्रिय रूप से स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान दे रही हैं. इसके अलावा करीब 30 हजार संविदा कर्मचारी भी इस मिशन के अंतर्गत कार्य कर रहे हैं.
इतना ही नहीं समय समय पर लगभग 25 से 30 हजार आउटसोर्स और अन्य संविदा कर्मचारी भी इस व्यवस्था से जुड़े रहते हैं. ऐसे में नई प्रणाली लागू होने के बाद हजारों कर्मचारियों को अपनी उपस्थिति और भुगतान के लिए बायोमेट्रिक प्रक्रिया से गुजरना होगा.
फर्जी उपस्थिति के मामलों के बाद लिया गया बड़ा फैसला
कुछ महीनों पहले भोपाल सहित प्रदेश के कई जिलों में फर्जी पहचान के जरिए उपस्थिति दर्ज कराने के मामले सामने आए थे. जांच में यह पाया गया कि कई कर्मचारियों की उपस्थिति ऐप में दर्ज थी लेकिन वे अपने कार्यस्थल पर मौजूद नहीं थे.
इन मामलों ने विभाग को चिंतित कर दिया था. इसके बाद पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए बायोमेट्रिक प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया गया. अधिकारियों का मानना है कि इस प्रणाली से फर्जी उपस्थिति की समस्या पर पूरी तरह रोक लगेगी और कामकाज की निगरानी बेहतर होगी.
एनएचएम अधिकारियों ने क्या कहा
एनएचएम के वित्त संचालक वीरभद्र शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार अब सभी संविदा स्टाफ आशा कार्यकर्ता और हितग्राहियों के भुगतान के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य किया जा रहा है.
उन्होंने यह भी कहा कि सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं कि 25 मार्च तक कर्मचारियों का पंजीकरण पूरा कर लिया जाए. ताकि अप्रैल से शुरू होने वाली नई भुगतान प्रणाली बिना किसी परेशानी के लागू की जा सके.
नई व्यवस्था से बढ़ेगी पारदर्शिता
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यह बदलाव कर्मचारियों और प्रशासन दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा. इससे भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और फर्जी उपस्थिति जैसी समस्याओं पर पूरी तरह रोक लगेगी.
इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि वास्तविक रूप से काम कर रहे कर्मचारियों को समय पर और सही तरीके से उनका मानदेय मिल सके. आने वाले समय में यह प्रणाली स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने में मदद कर सकती है.
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