यूपी बना 85 फीसदी सीवेज शोधन करने वाला में सक्षम राज्य,प्रतिदिन 4500 मिलियन लीटर से ज्यादा गंदा पानी हो रहा है शोधित
गंगा-यमुना की पवित्रता बनाए रखने की दिशा में साल 2035 तक 100 फीसदी जल पुनर्चक्रण का लक्ष्य
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश 'स्वच्छ प्रदेश' बनने की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कर रहा है। राज्य अब अपने कुल सीवेज का लगभग 85 प्रतिशत शोधन करने में सक्षम हो गया है। प्रतिदिन 4500 मिलियन लीटर से अधिक गंदे पानी को ट्रीट कर नदियों में गिरने से रोका जा रहा है। सरकार का अगला लक्ष्य अपशिष्ट जल को 'आर्थिक संपत्ति' बनाकर विकास का नया मॉडल पेश करना है।
योगी सरकार की कार्यप्रणाली ने नदियों के संरक्षण के प्रयासों को नई गति दी है। हर परियोजना की मॉनीटरिंग की जा रही है, जिससे न केवल गंगा-यमुना की पवित्रता सुनिश्चित हुई है, बल्कि नगरों में जल प्रबंधन की व्यवस्था भी मजबूत हो रही है। उत्तर प्रदेश में नमामि गंगे मिशन के दूसरे चरण ने प्रदेश के सीवरेज सिस्टम को आधुनिक बनाने में नमामि गंगे मिशन के दूसरे चरण ने अहम भूमिका निभाई है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में अब तक 74 सीवर शोधन परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें से 41 परियोजनाएं पूरी होकर सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं। वर्तमान में पूरे प्रदेश में 155 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पूरी क्षमता के साथ कार्य कर रहे हैं।
अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग मॉडल
योगी सरकार उपचारित जल के सुरक्षित पुन: उपयोग के लिए एक व्यापक नीति पर काम कर रही है, जिसे तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इसमें नगरपालिका के जरिए पार्कों की सिंचाई, सड़कों की सफाई और सार्वजनिक उद्यानों में उपयोग करना शामिल है।वहीं उद्योग और कृषि सेक्टर में औद्योगिक इकाइयों में कूलिंग/प्रोसेसिंग और खेतों की सिंचाई के लिए काम होगा। इसी प्रकार घरेलू व निर्माण: जैसे कार्यों और गैर-पेय उद्देश्यों के लिए रीसाइक्लिंग का कार्य किया जाएगा।
2035 तक 'ज़ीरो वेस्ट वाटर' का संकल्प
मुख्यमंत्री की दूरदर्शी योजना के तहत, जिन क्षेत्रों में एसटीपी क्रियाशील हैं, वहां 2030 तक 50 प्रतिशत और 2035 तक 100 प्रतिशत अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इससे न केवल भूजल पर निर्भरता कम होगी, बल्कि गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियों का पारिस्थितिकी तंत्र भी सुरक्षित रहेगा।
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लेखक के बारे में
ओ.पी. पाल पिछले साढ़े तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय एक प्रतिष्ठित नाम हैं। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (P.I.B. Accredited) वरिष्ठ पत्रकार श्री पाल ने लंबे समय तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के साथ-साथ गृह, रक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की नेशनल ब्यूरो स्तर पर रिपोर्टिंग की है।
अमर उजाला और दैनिक जागरण से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री पाल ने 'शाह टाइम्स' में न्यूज़ एडिटर और 'हरिभूमि' (दिल्ली) में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं। राजनीति विज्ञान और कृषि के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे 'साहित्य रत्न' से भी विभूषित हैं। वर्तमान में वे एक स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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