मेरठ में मोहन भागवत ने खिलाड़ियों से संवाद किया, संघ से जुड़ने के पांच मंत्र दिए
मेरठ। मेरठ में आरएसएस की गतिविधियों का बड़ा केंद्र माधवकुंज इन दिनों सुर्खियों में है। कारण माधवकुंज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत दो दिन के प्रवास पर हैं। माधवकुंज में आरएसएस के सरसंघचालक ने शुक्रवार को खिलाड़ियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों को मूल मंत्र दिया। उन्होंने खिलाड़ियों से संवाद करते हुए कहा कि आरएसएस किसी वर्ग विशेष के विरोध के लिए काम नहीं करता। आरएसएस का आधारभूत तत्व विविधता में एकता और भारतीय संस्कृति है।
उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य देश के हिंदू को संगठित करना है। संघ किसी वर्ग विशेष के विरोध में नहीं होता है।
शुक्रवार को माधवकुंज में मेरठ और ब्रज प्रांत के करीब 950 खिलाड़ियों से संघ के सरसंघचालक ने संवाद किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग संघ को समावेशी मानते हैं। ऐसे लोगों को समझना चाहिए कि ये राष्ट्र भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण, महावीर, बुद्ध, स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद और महात्मा गांधी का है। भारत को भौगोलिक सीमाओं में बांधकर नहीं देखा जाना चाहिए। भागवत ने कहा कि हिंदू कोई जाति नहीं, यह एक विशेषण है। जब हमारी एकता खंडित हुई है राष्ट्र पर संकट आया है। उन्होंने कहा कि पूजा पद्धति और देवी-देवता भिन्न हो सकते हैं, परंतु इस विविधता में एकता का भाव ही हमारी संस्कृति का आधारभूत तत्व है।
इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों के सवालों के जवाब भी दिए।
संघ से जुड़ने के पांच मंत्र
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आरएसएस से जुड़ने के पांच मंत्र दिए। पहला संघ के कार्यक्रमों में सम्मिलित होकर संघ को अंदर से देखने का, दूसरा संघ के किसी अनुषांगिक संगठन से जुड़कर काम करने का, तीसरा संघ के विभिन्न कार्यक्रमों में किसी न किसी तरह सहयोग करने, चौथा अपना काम करते हुए संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम अथवा स्वयंसेवकों से संवाद बनाने और पांचाव और अंतिम कोई न कोई अच्छा, प्रमाणिक एवं निस्वार्थ भाव से देश के लिए कार्य करते रहना।
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