बागपत में जिलाधिकारी ने रूरल मार्ट का किया उद्घाटन

बागपत। आज जिलाधिकारी राजकमल यादव ने नाबार्ड प्रायोजित रूरल मार्ट का उद्घाटन किया। रूरल मार्ट एक मार्केटिंग आउटलेट है। इसमें जनपद में नाबार्ड द्वारा सहयोग प्राप्त सभी एफपीओ तथा एसएचजी सदस्य अपने उत्पादों की ब्रांडिंग कर रिटेल में बिक्री कर सकते हैं। यह एक प्रकार की दुकान है जो जिला स्तर पर ग्रामीण किसानों, लघु […]
बागपत। आज जिलाधिकारी राजकमल यादव ने नाबार्ड प्रायोजित रूरल मार्ट का उद्घाटन किया। रूरल मार्ट एक मार्केटिंग आउटलेट है। इसमें जनपद में नाबार्ड द्वारा सहयोग प्राप्त सभी एफपीओ तथा एसएचजी सदस्य अपने उत्पादों की ब्रांडिंग कर रिटेल में बिक्री कर सकते हैं। यह एक प्रकार की दुकान है जो जिला स्तर पर ग्रामीण किसानों, लघु उद्योग कर्ताओं एवं स्वयं सहायता स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई महिलाओं को अपने द्वारा निर्मित पदार्थों के लिए एक मार्केटिंग चैनल प्रदान करता है।
रूरल मार्ट योजना के अंतर्गत नाबार्ड 3 साल तक दुकान का किराया, सेल्समैन की तनख्वाह की तनख्वाह, मार्ट के पब्लिसिटी पर होने वाला व्यय, सेल्समैन की ट्रेनिंग का खर्चा इत्यादि पर योगदान देता है। यह मार्ट नाबार्ड द्वारा सहयोग प्राप्त एफपीओ है। हालांकि नाबार्ड के साथ किए गए अनुबंध के अनुसार जिले के सभी एफपीओ अपनी सुविधा के अनुसार इस मार्ट की सेवाएं इस्तेमाल करते हुए अपने उत्पाद बेच सकते हैं।
डीएम ने नाबार्ड द्वारा की गई जिले में इस पहल की प्रशंसा की और साथ वहां मौजूद सभी एफपीओ मेंबर्स और एसएचजी मेंबर्स का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें इस मार्ट को सफल बनाने के लिए प्रेरित किया। रूरल मार्ट को स्थापित करने में योगदान दे रही है।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
पत्रकारिता के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने वर्ष 2010 में नोएडा से रॉयल बुलेटिन के प्रिंट संस्करण का सफल विस्तार किया। समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य को समझते हुए, उनके नेतृत्व में यह संस्थान आज एक मजबूत और प्रभावशाली डिजिटल समाचार मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।
वर्तमान में रॉयल बुलेटिन की पहुँच न्यूज़ पोर्टल, फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सहित सभी प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों पाठकों तक है। प्रिंट और डिजिटल मीडिया के स्वामी एवं संपादक के रूप में अनुभव, सत्यनिष्ठा और जन-सरोकार उनकी पत्रकारिता की मूल आधारशिला रहे हैं।

टिप्पणियां