दुबई में फंसा गोविंदपुरम का बेटा, गाजियाबाद में परिवार की बढ़ी धड़कनें
गाजियाबाद: मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच छिड़े युद्ध जैसे हालात ने गाजियाबाद के गोविंदपुरम स्थित एक परिवार की रातों की नींद उड़ा दी है। गोविंदपुरम निवासी कारोबारी राकेश मित्तल और उनकी पत्नी ऊषा मित्तल का सबसे छोटा बेटा मनु मित्तल दुबई में फंसा हुआ है। युद्ध के कारण बिगड़े हालात और हवाई सेवाओं के बाधित होने से मनु की होली पर घर आने की योजना तो टली ही है, साथ ही अब उनकी सुरक्षित वापसी को लेकर परिवार गहरे सदमे में है।
होली पर घर आने की थी तैयारी, अब कफ्यू जैसे हालात
ये भी पढ़ें नोएडा: आवारा सांडों का खूनी आतंक, दो अलग-अलग हमलों में एक की मौत और दूसरा गंभीर रूप से घायलमनु मित्तल पिछले चार वर्षों से दुबई में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। वर्ष 2021 में उनका विवाह हुआ था और वर्तमान में उनकी पत्नी व तीन वर्षीय बेटी भी उनके साथ दुबई में ही रह रहे हैं। परिवार के अनुसार, मनु इस बार होली का त्योहार मनाने के लिए गाजियाबाद आने वाले थे, लेकिन क्षेत्र में बढ़ते तनाव और हवाई अड्डों के आसपास धमाकों की खबरों के बाद उड़ानें प्रभावित हो गई हैं। सुरक्षा कारणों से कई रूट बंद होने के कारण उनकी यात्रा अधर में लटक गई है।
दुबई से मनु की अपील: 'जैसे यूक्रेन से निकाला, वैसे हमें भी बचाए सरकार'
ये भी पढ़ें कुआं पूजन के दौरान हुए विवाद में धारदार हथियार से हमला कर युवक की हत्या, आराेपित गिरफ्तारहमारे संवाददाता ने दुबई में फंसे मनु मित्तल से वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क किया। मनु ने वहां की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि जिस तरह के हालात बन रहे हैं, वह डराने वाले हैं। मनु ने भारत सरकार से भावुक अपील करते हुए कहा, "भारत सरकार को कूटनीति के जरिए हमारे लिए कोई सुरक्षित रास्ता निकालना चाहिए। जिस तरह यूक्रेन संकट के समय भारतवासियों को सुरक्षित निकाला गया था, उसी तरह हमें भी दुबई से निकालने के लिए सरकार को तत्काल कदम उठाने चाहिए।"
सरकार से सुरक्षित वापसी की गुहार
पिता राकेश मित्तल ने केंद्र सरकार और भारतीय दूतावास से गुहार लगाई है कि विदेशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि हर बीतता पल उनकी बेचैनी बढ़ा रहा है। गोविंदपुरम के पड़ोसी और परिचित भी मित्तल परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं। फिलहाल, परिवार की नजरें टीवी पर आने वाली हर अपडेट और भारत सरकार की संभावित पहल पर टिकी हैं। उन्हें उम्मीद है कि सरकार जल्द ही कोई ठोस कदम उठाएगी ताकि उनका बेटा, बहू और पोती सुरक्षित वतन लौट सकें।
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