टाइगर स्टेट में खतरे की घंटी, 15 महीनों में 64 बाघों की मौत, करंट बन रहा सबसे बड़ा किलर

मध्यप्रदेश जिसे टाइगर स्टेट कहा जाता है वहां से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। पिछले 15 महीनों में प्रदेश में 64 बाघों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा न सिर्फ चौंकाने वाला है बल्कि वन्यजीव संरक्षण के लिए एक बड़ा सवाल भी खड़ा करता है।
करंट बना बाघों के लिए सबसे बड़ा खतरा
इन मौतों में सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि 16 बाघों की मौत करंट लगने से हुई है। गांव और खेतों के पास बाघों के पहुंचने से यह खतरा और बढ़ गया है। कई किसान अपनी फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए खेतों के चारों ओर बिजली के तार लगा देते हैं। यही करंट बाघों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।
ये भी पढ़ें इंदौर में युद्ध का असर, यूरोप और दुबई ट्रिप कैंसिल, अब सिंगापुर वियतनाम और थाईलैंड बन रहे पहली पसंदजंगल से गांव तक बढ़ रहा बाघों का दायरा
विशेषज्ञों का मानना है कि भोजन और पानी की तलाश में बाघ अब जंगलों से बाहर निकलकर गांवों और खेतों की ओर आ रहे हैं। यही वजह है कि इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव बढ़ रहा है और हादसे भी ज्यादा हो रहे हैं।
मंडला जबलपुर में सामने आए ज्यादा मामले
प्रदेश के मंडला और जबलपुर संभाग में करंट से बाघों की मौत के कई मामले सामने आए हैं। यह स्थिति वन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है क्योंकि इन क्षेत्रों में जंगल और आबादी के बीच दूरी कम होती जा रही है।
ये भी पढ़ें मप्र के मुख्यमंत्री ने राजस्थान के उद्योगपतियों के साथ की वन-टू-वन चर्चा, निवेश के लिए किया आमंत्रितआपसी संघर्ष और प्राकृतिक कारण भी जिम्मेदार
करंट के अलावा बाघों की मौत के पीछे अन्य कारण भी सामने आए हैं। कुछ मामलों में बाघों के बीच आपसी लड़ाई हुई है तो कुछ मौतें प्राकृतिक कारणों से भी हुई हैं। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाल ही में आपसी संघर्ष के कारण बाघों की मौत के मामले सामने आए थे।
पिछले साल भी चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े
अगर पिछले साल की बात करें तो 2025 में भी 53 से ज्यादा बाघों की मौत दर्ज की गई थी। यह दिखाता है कि समस्या लगातार बढ़ रही है और इसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
वन विभाग के सामने बड़ी चुनौती
बढ़ती घटनाओं को देखते हुए वन विभाग अब सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। अवैध करंट लगाने पर कार्रवाई तेज की जाएगी और किसानों के बीच जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
जागरूकता और सख्ती से मिलेगी राहत
वन विभाग का कहना है कि कई बार ऐसी घटनाओं की जानकारी समय पर नहीं मिल पाती जिससे कार्रवाई में देरी होती है। अब विभाग जागरूकता के साथ साथ सख्ती भी बढ़ाएगा ताकि बाघों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और टाइगर स्टेट की पहचान को बचाया जा सके।
भविष्य के लिए जरूरी कदम
अगर समय रहते इस समस्या पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो आने वाले समय में बाघों की संख्या पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि किसान और प्रशासन मिलकर ऐसा समाधान निकालें जिससे फसल भी सुरक्षित रहे और वन्यजीव भी।
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