LPG की किल्लत से परेशान देश लेकिन MP का यह गांव बिना सिलेंडर 24 घंटे चला रहा चूल्हा जानिए पूरा राज

एलपीजी की किल्लत आज आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी है कोई घंटों लाइन में खड़ा है तो कोई महंगे दामों में सिलेंडर खरीदने को मजबूर है ऐसे समय में मध्य प्रदेश के जबलपुर का एक गांव उम्मीद की नई कहानी लिख रहा है जहां लोगों को एलपीजी की चिंता ही नहीं है
जब हर घर में जल रही है गोबर गैस
मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के बंदरकोला गांव में करीब 75 प्रतिशत घरों में एलपीजी की जगह गोबर गैस से चूल्हा जलता है लगभग ढाई हजार की आबादी वाले इस गांव में चार सौ से ज्यादा घर हैं और इनमें से करीब 300 घरों में बायो गैस प्लांट लगे हुए हैं यहां के लोगों को दिन रात गैस मिलती है जिससे खाना बनाने में कोई दिक्कत नहीं होती और महिलाओं को सिलेंडर के लिए इंतजार नहीं करना पड़ता
ये भी पढ़ें मध्य प्रदेश में बदलेगा मौसम का मिजाज, चार दिन आंधी-बारिश का अलर्ट, ग्वालियर-जबलपुर में बरसेंगे बादलएलपीजी संकट में भी बेफिक्र गांव
जहां देश के कई हिस्सों में लोग एलपीजी की कमी से परेशान हैं वहीं इस गांव के लोग इस समस्या से पूरी तरह दूर हैं यहां की महिलाएं बताती हैं कि उन्हें एलपीजी संकट की खबर तो है लेकिन उनके घरों में गोबर गैस होने से उन्हें किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता. गांव की रहने वाली नीता पटेल का कहना है कि यह तरीका सस्ता आसान और हमेशा काम आने वाला है इससे गोबर का सही उपयोग भी हो जाता है और गैस भी मिल जाती है
सरपंच की पहल से आई बड़ी क्रांति
इस बदलाव की शुरुआत वर्ष 2013 में हुई जब गांव के पूर्व सरपंच अजय पटेल ने अपने घर में पहला गोबर गैस प्लांट लगाया उस समय यह एक छोटा सा प्रयोग था लेकिन धीरे धीरे यह पूरे गांव में फैल गया. लोगों ने इसके फायदे देखे और अपने घरों में भी प्लांट लगाना शुरू कर दिया आज यह गांव आत्मनिर्भर बन चुका है और एलपीजी पर निर्भरता लगभग खत्म हो गई है
ये भी पढ़ें MP Board Result 2026 कॉपी जांच लगभग पूरी अब इस तारीख तक जारी हो सकता है 10वीं 12वीं का रिजल्टआंगन से रसोई तक सीधी गैस
इस गांव में बायो गैस बनाने के लिए घरों के पीछे गड्ढा बनाया जाता है जिसमें गोबर और पानी मिलाकर गैस तैयार की जाती है इसके बाद पाइपलाइन के जरिए यह गैस सीधे किचन तक पहुंचती है. इसमें ज्यादा खर्च नहीं आता और किसी बड़े प्लांट की जरूरत नहीं होती यही कारण है कि यह तरीका गांव के लिए सबसे आसान और सफल साबित हुआ है.
फिर से बढ़ रही बायो गैस की मांग
कुछ समय पहले जिन घरों में गाय नहीं थी वहां बायो गैस प्लांट बंद हो गए थे लेकिन अब एलपीजी की बढ़ती कीमत और कमी के कारण लोग फिर से इस तरीके की ओर लौट रहे हैं.. कई परिवार अपने पुराने प्लांट फिर से चालू कर रहे हैं जिससे गांव में फिर से बायो गैस का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है
पूरे देश के लिए बन सकता है मॉडल
मध्य प्रदेश का यह गांव आज पूरे देश के लिए एक मिसाल बन गया है अगर अन्य गांव भी इस मॉडल को अपनाएं तो एलपीजी पर निर्भरता कम हो सकती है और लोगों को सस्ती और आसान गैस मिल सकती है यह तरीका पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है और गांव को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करता है.
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
युवा और ऊर्जावान पत्रकार चयन प्रजापत 'रॉयल बुलेटिन' के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आपकी मुख्य विशेषज्ञता खेल (Sports), कृषि (Farming) और ऑटोमोबाइल (Automobile) सेक्टर में है। चयन प्रजापत इन विषयों की तकनीकी समझ के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत को अपनी खबरों में पिरोने के लिए जाने जाते हैं। इंदौर और मालवा क्षेत्र की खबरों के साथ-साथ ऑटोमोबाइल और खेल जगत की विशेष कवरेज के लिए आप रॉयल बुलेटिन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

टिप्पणियां