सारा अली खान को देना होगा सनातनी शपथ पत्र, बद्री-केदार में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर 'आस्था पत्र' की लगी शर्त

देहरादून/रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध चारधामों की मर्यादा और सनातन परंपराओं की शुचिता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने एक ऐतिहासिक और कड़ा निर्णय लिया है। लंबे समय से चल रही 'नॉन-हिंदू' प्रवेश वर्जित की चर्चाओं के बीच BKTC के अध्यक्ष अजेय अजय और चेयरमैन हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट कर दिया है कि अब मुस्लिम, ईसाई या किसी भी अन्य गैर-सनातनी धर्म के व्यक्ति को धामों में प्रवेश के लिए "लिखित आस्था" का प्रमाण देना अनिवार्य होगा।
इस नए नियम की जद में बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान भी आती दिख रही हैं। मंदिर समिति के चेयरमैन हेमंत द्विवेदी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि सारा अली खान भविष्य में बाबा केदार या बद्री विशाल के दर्शन के लिए आती हैं, तो उन्हें पहले एक औपचारिक शपथ पत्र (Affidavit) देना होगा। इसमें उन्हें यह प्रमाणित करना होगा कि उनकी आस्था सनातन धर्म और इन देवी-देवताओं में है। इसके बाद ही उन्हें मंदिर परिसर के भीतर प्रवेश की अनुमति मिल सकेगी।
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सुरक्षा की दृष्टि से और 'लैंड जिहाद' या जनसांख्यिकीय बदलाव की चिंताओं को देखते हुए, मंदिर समिति ने यात्रियों के वेरिफिकेशन (सत्यापन) की प्रक्रिया को भी सख्त कर दिया है। समिति का मानना है कि आस्था के इन केंद्रों पर केवल उन्हीं का स्वागत है जिनकी इनमें सच्ची श्रद्धा है। इस फैसले ने न केवल बॉलीवुड बल्कि उत्तराखंड की राजनीति और धार्मिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।
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मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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