मुजफ्फरनगर: ग्राम पंचायत बसेड़ा में भ्रष्टाचार की जांच फाइलों में दफन, एक साल बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
मुजफ्फरनगर। जनपद की ग्राम पंचायत बसेड़ा में विकास कार्यों के नाम पर हुए कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। जिलाधिकारी के आदेश के बावजूद करीब एक साल से जांच की फाइलें अधिकारियों के कार्यालयों में धूल फांक रही हैं। पीड़ित शिकायतकर्ता ने अब दोबारा जिलाधिकारी का दरवाजा खटखटाते हुए जांच के नाम पर केवल 'खानापूर्ति' करने और असली दोषियों को बचाने का गंभीर आरोप लगाया है।
अधिकारियों ने खुद जाने के बजाय अधीनस्थों को भेजा
ग्राम पंचायत बसेड़ा निवासी खुशनसीब ने जिलाधिकारी को सौंपे शिकायती पत्र में बताया कि ग्राम प्रधान और सचिव ने मिलकर विकास कार्यों में भारी बंदरबांट की है। शिकायत के बाद जिलाधिकारी ने जिला गन्ना अधिकारी और लोक निर्माण विभाग (PWD) के सहायक अभियंता की एक संयुक्त जांच टीम गठित की थी। आरोप है कि मौके पर मुख्य अधिकारी खुद जांच करने के बजाय अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को भेजकर केवल औपचारिकताएं पूरी कर रहे हैं। तकनीकी जांच के लिए नामित सहायक अभियंता का मौके पर न पहुंचना पूरी प्रक्रिया पर सवालिया निशान खड़े कर रहा है।
ये भी पढ़ें अकीदत के साथ अदा की गई माहे रमजान के तीसरे जुमे की नमाज, मस्जिदों में उमड़ी नमाजियों की भारी भीड़एक साल से लटका है इंसाफ
शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने सबसे पहले 30 दिसंबर 2024 को भ्रष्टाचार की शिकायत की थी। इसके बाद 10 फरवरी 2025 और फिर 8 अप्रैल 2025 को डीपीआरओ (DPRO) कार्यालय से स्थलीय निरीक्षण के आदेश जारी हुए। विडंबना यह है कि आदेशों की कतार के बावजूद एक साल बीत जाने के बाद भी जांच किसी तार्किक परिणति तक नहीं पहुंच पाई है। पीड़ित का कहना है कि जांच में हो रही यह देरी भ्रष्टाचार को संरक्षण देने जैसी है।
प्रधान के आरोपों को बताया बेबुनियाद
खुशनसीब ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्राम प्रधान द्वारा मीडिया के माध्यम से उन पर 10 लाख रुपये मांगने के जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह झूठे और निराधार हैं। उनके अनुसार, यह केवल भ्रष्टाचार के मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाने और शिकायतकर्ता को दबाव में लेने की एक साजिश है।
निष्पक्ष कमेटी बनाने की मांग
पीड़ित ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई है कि इस मामले की जांच किसी उच्च स्तरीय प्रशासनिक अधिकारी की अध्यक्षता में गठित नई कमेटी से कराई जाए। उन्होंने मांग की है कि मौके पर जाकर गहनता से तकनीकी जांच की जाए ताकि ग्राम पंचायत में हुए गबन का सच सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित हो।
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