मुजफ्फरनगर में भोपा व ककरौली क्षेत्र के 78 गाँवों में 147 स्थानों पर होगा होलिका दहन, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की पैनी नजर, कस्बा भोकरहेड़ी में 9 तो ककरौली क्षेत्र में 46 जगहों पर जलेगी होली
मोरना। जनपद के भोपा और ककरौली थाना क्षेत्रों में रंगों के त्योहार होली की तैयारियाँ आधिकारिक रूप से शुरू हो गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक स्थानों पर पारंपरिक रूप से ईंधन, गन्ने की पत्तियां और गोबर के उपले (बरकुल्ले) इकट्ठा कर होली का रूप दिया जाने लगा है। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और तहसील प्रशासन ने कमर कस ली है और संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित कर सुरक्षा घेरा तैयार किया है।
भोपा क्षेत्र: 14 स्थान मिश्रित आबादी के लिए चिन्हित
क्षेत्राधिकारी भोपा, देवव्रत वाजपेयी ने बताया कि भोपा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 54 गाँवों में कुल 101 स्थानों पर होलिका दहन किया जाएगा। सुरक्षा की दृष्टि से 14 स्थानों को मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया है, जहाँ अतिरिक्त सतर्कता बरती जाएगी। थाना प्रभारी निरीक्षक जसवीर सिंह ने कहा कि सभी संवेदनशील पॉइंट्स पर पुलिस की विशेष व्यवस्था की गई है ताकि पर्व सकुशल संपन्न हो सके।
कस्बा भोकरहेड़ी में सबसे अधिक उत्साह
लेखपाल मनोज कुमार के अनुसार, कस्बा भोकरहेड़ी में सबसे अधिक 9 स्थानों पर होलिका दहन होगा। यहाँ मुख्य रूप से सुभाष चौक, नेहरू चौक, हरिजन चौक, बेहड़ा पट्टी, लोकुपुरा उत्तरी, वाल्मीकि बस्ती और कुंवापट्टी मोहल्लों में होली सजाई जा रही है। वहीं, कानूनगो सुनील शर्मा ने जानकारी दी कि गादला गाँव में धुलेंडी के बाद पारंपरिक मेले का भव्य आयोजन किया जाएगा।
ककरौली पुलिस का सुरक्षा घेरा
ककरौली थानाध्यक्ष जोगेन्द्र सिंह ने बताया कि उनके थाना क्षेत्र के 24 गाँवों में 46 स्थानों पर होलिका दहन की सूची तैयार की गई है। यहाँ भी पुलिस बल लगातार गश्त कर शांति समितियों के साथ समन्वय बना रहा है।
स्मृतियों की होली:पुरानी परंपराएं और बदलते दौर
फिरोजपुर निवासी बुजुर्ग किसान वीरपाल सिंह बालियान ने पुरानी यादें साझा करते हुए बताया कि पहले होली का स्वरूप बहुत विशाल होता था। उन्होंने बताया, "पुराने समय में घरों पर घास-फूस के छप्पर होते थे, जिन्हें होली के समय बदला जाता था। पुराने छप्परों को होली की ढेरी पर रखा जाता था। महिलाएं गोबर के बरकुल्ले की बड़ी-बड़ी मालाएं चढ़ाती थीं, जिससे होली का आकार काफी बड़ा हो जाता था। हालांकि, बदलते वक्त के साथ अब होली का आकार पहले की तुलना में घट रहा है।
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लेखक के बारे में
पत्रकार नरेंद्र बालियान पिछले 6 वर्षों से मुज़फ्फरनगर के भोपा, मोरना और ककरौली क्षेत्र में 'रॉयल बुलेटिन' के प्रतिनिधि के रूप में निरंतर सक्रिय हैं। क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक स्थितियों की गहरी समझ रखने वाले नरेंद्र बालियान ग्रामीण समस्याओं और विकास कार्यों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं। पिछले 6 सालों में उन्होंने अपनी निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से भोपा-मोरना क्षेत्र की जनता और प्रशासन के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य किया है। क्षेत्र की खबरों और सूचनाओं के लिए आप उनसे मोबाइल नंबर 7906131417 पर संपर्क कर सकते हैं।

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