संभल: फाल्गुन मास की चौबीस कोसीय परिक्रमा संपन्न, फूलों और गुलाल की होली से गूंजा तीर्थ क्षेत्र
संभल में फाल्गुन मास के अवसर पर आयोजित चौबीस कोसीय मासिक परिक्रमा भक्तिभाव और उत्साह के साथ संपन्न हो गई। चौबीस कोसीय मासिक परिक्रमा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं ने बड़े उल्लास के साथ भाग लिया। परिक्रमा के दौरान वृंदावन की तर्ज पर फूलों और रंग-गुलाल की होली का विशेष आयोजन आकर्षण का केंद्र रहा।
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वंशगोपाल तीर्थ से हुआ शुभारंभ
रविवार को परिक्रमा का शुभारंभ संभल के थाना हयातनगर क्षेत्र के गांव बैनीपुर चक स्थित श्री वंशगोपाल तीर्थ से हुआ। यहां सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पवित्र कुंड और पौराणिक कदम वृक्ष की परिक्रमा कर पुण्य अर्जित किया। वातावरण भक्तिमय भजनों और जयकारों से गूंज उठा।
भोलेनाथ मंदिर में पूजन और होली उत्सव
परिक्रमा के अगले पड़ाव पर श्रद्धालु ब्रह्माजी द्वारा स्थापित भोलेनाथ मंदिर पहुंचे, जहां विधि-विधान से आरती और जलाभिषेक किया गया। भगवान शंकर, कल्कि और हरिहर को पुष्प और गुलाल अर्पित कर श्रद्धालुओं ने होली खेली। इस दौरान पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक उल्लास का माहौल बना रहा।
लठमार होली बनी आकर्षण का केंद्र
श्री वंशीगोपाल तीर्थ पर महिलाओं द्वारा आयोजित लठमार होली ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। पारंपरिक अंदाज में महिलाओं ने लाठियों से प्रतीकात्मक वार किए, जबकि पुरुषों ने ढाल से बचाव करते हुए नृत्य किया। इस अनोखे आयोजन ने श्रद्धालुओं को वृंदावन की होली की झलक दिखाई।
भजन-कीर्तन और रुद्राष्टकम का पाठ
श्रद्धालुओं ने रंग-बिरंगे गुलाल और पुष्पों के साथ होली खेलते हुए भजन-कीर्तन किया। परिक्रमा जब भुवनेश्वर तीर्थ पहुंची, तो वहां पंडित शोभित शास्त्री, पंडित मुकेश शर्मा, विशाल शर्मा और पंडित विनीत शर्मा ने रुद्राष्टकम का पाठ कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
चामुंडा मंदिर में पारंपरिक उत्सव
चामुंडा मंदिर में पारंपरिक होली गीतों के साथ नृत्य और फूलों की होली का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने भक्ति और उत्साह के साथ एक-दूसरे को गुलाल लगाकर पर्व की खुशियां मनाईं।
क्षेमनाथ धाम और नैमिषारण्य तीर्थ पर समापन की ओर
इसके बाद परिक्रमा प्रोजपुर चामुंडा मंदिर होते हुए क्षेमनाथ धाम और नैमिषारण्य तीर्थ पहुंची। यहां बाबा बालयोगी दीनानाथ जी महाराज ने विधि-विधान से आरती कराई। श्रद्धालुओं ने पुष्प और गुलाल के साथ होली खेलकर आनंद व्यक्त किया।
जयकारों से गूंजा पूरा परिक्रमा मार्ग
पूरे परिक्रमा मार्ग में “हर-हर महादेव” और “जय श्रीहरि” के जयकारे गूंजते रहे। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने इस आयोजन में भाग लेकर भक्ति और उल्लास के साथ फाल्गुन मास के इस आध्यात्मिक पर्व को मनाया।
परिक्रमा का विशेष महत्व
परिक्रमा समिति के अध्यक्ष राजकुमार शर्मा ने बताया कि संभल नगरी को तीर्थराज संभल कहा जाता है, जहां 68 तीर्थ और 19 पवित्र कूप स्थित हैं। उन्होंने बताया कि 24 कोस की परिक्रमा का विशेष धार्मिक महत्व है और इसे करने से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है।
फिलहाल, इस भव्य आयोजन ने संभल में धार्मिक आस्था, संस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया, जिसमें श्रद्धालु भक्ति और रंगों के साथ सराबोर नजर आए।
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लेखक के बारे में
अभिषेक भारद्वाज एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 11 वर्षों से मुरादाबाद मंडल की पत्रकारिता का व्यापक अनुभव है। वे मुरादाबाद के प्रतिष्ठित एसएस न्यूज़ चैनल में संपादकीय प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण पद पर कार्य कर चुके हैं। मुरादाबाद की राजनीतिक, सामाजिक और स्थानीय खबरों पर उनकी गहरी पकड़ है। वर्तमान में वे रॉयल बुलेटिन के मुरादाबाद जिला प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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