मेरठ: चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में “आर्ट थेरेपी: रंगों के माध्यम से भावनाओं की अभिव्यक्ति” पर कार्यशाला आयोजित
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के मनोविज्ञान विभाग द्वारा “आर्ट थेरेपी: एक्सप्रेसिंग इमोशंस थ्रू कलर्स, विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला में विद्यार्थियों और शिक्षकों को कला चिकित्सा की अवधारणा, तकनीकों एवं इसके व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराया गया।
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में सभी आगंतुकों का स्वागत मनोविज्ञान विभाग के कार्यवाहक विभागाध्यक्ष प्रोo संजय कुमार द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि “जहाँ शब्द कम पड़ जाते हैं, वहीं कला बोलना शुरू करती है और हमारे मन को उपचार प्रदान करती है।” उन्होंने यह भी बताया कि यह कार्यशाला सभी प्रतिभागियों के लिए एक समृद्ध और उपयोगी सीखने का अनुभव सिद्ध होगी।
कार्यक्रम की संयोजिका प्रो. अंशु अग्रवाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागी उन विधियों को सीखेंगे, जिनका उपयोग मनोवैज्ञानिक निदान एवं उपचार में कला के रूप में करते हैं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के मुख्य छात्रावास अधीक्षक प्रोo दिनेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि आर्ट थेरेपी क्लाइंट के मन तक पहुँचने में सहायक एवं विधि है तथा हमारी दैनिक गतिविधियाँ भी किसी न किसी रूप में एक कला के रूप में हे अभिव्यक्त होती हैं, जो हमें एक खुशहाल जीवन जीने में मदद करती हैं। उन्होंने कहा कि बदलते समय और बदलते रुझानों के साथ आर्ट थेरेपी जैसी तकनीकें हमें स्वयं को और अन्य व्यक्ति को समझने में अत्यंत उपयोगी माध्यम सिद्ध हो सकती हीं हैं। क्योंकि प्रत्येक मनुष्य अपने जीवन और भावनाओं को अपने-अपने कैनवास पर प्रतिबिंबित करता है और वही हमारी जीवंत कला है।
विशिष्ट अतिथि प्रो. भारद्वाज ने कहा कि कला के माध्यम से अवचेतन मन को समझा जा सकता है तथा यह तनाव प्रबंधन और रोगों के निदान में सहायक होती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रत्येक मनोवैज्ञानिक को आर्ट थेरेपी सीखनी चाहिए।
कार्यशाला की मुख्य वक्ता एवं प्रशिक्षणकरता डॉ. ममता अग्रवाल रहीं जिन्होंने आर्ट थेरेपी का प्रशिक्षण दो सत्रों में प्रदान किया। प्रथम सत्र में आर्ट थेरेपी की मूल अवधारणाओं को समझाया गया, जबकि द्वितीय सत्र में आत्म-समझ, निदान एवं उपचार से संबंधित व्यावहारिक अभ्यास कराए गए। उन्होंने कहा कि “यह कार्यशाला कला बनाने के बारे में नहीं, बल्कि कला को अर्थ गढ़ने देने के बारे में है।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि “कला हमें कानों से नहीं, बल्कि मन और हाथों से सुनने के लिए आमंत्रित करती है।”कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने आर्ट से संबंधित तकनीकें जैसे, ड्राइंग एवं पेंटिंग, मंडला, आर्ट जर्नलिंग, फ्री डूडलिंग, क्ले से स्कल्प्टिंग को जानने के साथ-साथ रंगों के माध्यम से आत्मविश्वास बढ़ाना एवं स्वयं को अभिव्यक्त करना, जीवन कौशल का विकास करना, रचनात्मक रूप से कृतज्ञता की अभिव्यक्ति करना, आत्म-प्रेम विकसित करना एवं अपनी शक्तियों को पहचानना एवं कला के माध्यम से माइंडफुलनेस एवं विश्रांति आदि के संबंध में प्रशिक्षण लिया।
कार्यक्रम का संचालन एम.ए. की छात्रा सुश्री प्रियंशी सिरोही द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन सहायक शिक्षक श्री दरवेश सिंह ने प्रस्तुत किया। कार्यशाला में विभाग के सभी सहायक शिक्षक श्री दरवेश सिंह, डॉo लवलीन तिवारी, डॉo चित्रा गुप्ता, वाणी, डॉo शिल्पी राजपूत कनिका बंसल, एवं एम.ए., बी.ए., पीजीडीजीसी तथा बी.ए. ऑनर्स के छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
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