ओडिशा में राज्यसभा की चार सीटों में से तीन पर भाजपा की जीत, बीजद को एक सीट

भुवनेश्वर। हार्स ट्रेडिंग और क्रॉस-वोटिंग के आरोपों के बीच हुए राज्यसभा चुनाव में ओडिशा की चार सीटों में से तीन पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके समर्थित उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जबकि बीजू जनता दल (बीजद) को एक सीट पर सफलता मिली।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और मौजूदा सांसद सुजीत कुमार भाजपा की ओर से विजयी घोषित किए गए। वहीं बीजद के संतृप्त मिश्र ने भी एक सीट जीती। इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय जिन्होंने भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, उन्होंने भी जीत हासिल की।
भाजपा समर्थित दिलीप राय और बीजद के उम्मीदवार डॉ. दत्तेश्वर होता, जिन्हें कांग्रेस और माकपा का समर्थन प्राप्त था, दोनों को 23-23 प्रथम वरीयता वोट मिले। इसके बाद मुकाबला द्वितीय वरीयता मतों की गणना तक पहुंच गया।
दिलीप राय की यह जीत एक तरह से उनके राजनीतिक करियर की वापसी मानी जा रही है, जो वर्ष 2002 में भी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा चुनाव जीत चुके हैं। उस समय भी उन्होंने विभिन्न दलों के नेताओं के साथ अपने मजबूत संबंधों के दम पर जीत हासिल की थी।
बीजद को एक सीट मिलने के बाद उसके पास 18 अतिरिक्त वोट थे और पार्टी को उम्मीद थी कि कांग्रेस के 14 विधायकों और माकपा के एक विधायक के समर्थन से डॉ. होता को जीत दिलाई जा सकेगी। हालांकि यह रणनीति सफल नहीं हो सकी, क्योंकि चुनाव के दौरान 10 विधायकों-जिनमें सात बीजद और तीन कांग्रेस के थे-ने कथित रूप से क्रॉस-वोटिंग कर दी। सोमवार को हुए इस चुनाव में ओडिशा विधानसभा के सभी 147 सदस्यों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
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मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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