IDFC फर्स्ट बैंक घोटाला: ₹597 करोड़ की हेराफेरी पर ED का बड़ा एक्शन; 5 शहरों के 19 ठिकानों पर छापेमारी
नयी दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े 597 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला, गुरुग्राम और बेंगलुरु में कुल 19 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। ईडी के चंडीगढ़ जोनल कार्यालय के अनुसार यह मामला हरियाणा सरकार, नगर निगम चंडीगढ़ और अन्य सरकारी खातों के 597 करोड़ रुपये के गबन से जुड़ा है। यह राशि बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में जमा की जानी थी, लेकिन आरोप है कि संबंधित लोगों ने बिना अनुमति सरकारी धन को दूसरी जगहों पर डायवर्ट कर दिया।
तलाशी अभियान में पूर्व बैंक कर्मचारी रिभव ऋषि और अभय कुमार, उनके परिजनों तथा लाभार्थी शेल कंपनियों को शामिल किया गया। जांच के दायरे में स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, कैपको फिनटेक सर्विसेज, मां वैभव लक्ष्मी इंटीरियर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियां भी आईं। इसके अलावा सावन ज्वेलर्स और रियल एस्टेट डेवलपर विक्रम वाधवा तथा उनकी व्यावसायिक इकाइयों पर भी छापे मारे गए।
ईडी ने यह जांच प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत शुरू की है। यह कार्रवाई हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, पंचकूला द्वारा फरवरी 2026 में दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई थी। जांच में हरियाणा के विकास एवं पंचायत विभाग के बैंक खाते में बैलेंस में गड़बड़ी सामने आई थी, जो आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में संचालित थे। ईडी के अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने सरकारी धन को कई शेल कंपनियों के माध्यम से घुमाकर छिपाने (लेयरिंग) की कोशिश की। इस पूरे घोटाले में स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड नामक शेल कंपनी के जरिए सबसे पहले बड़ी रकम को डायवर्ट किया गया। इस कंपनी के साझेदार स्वाति सिंगला और अभिषेक सिंगला बताए गए हैं। इसके बाद धन को ज्वेलर्स के बैंक खातों के जरिए आगे भेजा गया, ताकि फर्जी बिलिंग के माध्यम से सोने की खरीद का भ्रम पैदा किया जा सके।
ईडी के अनुसार यह घोटाला पिछले एक वर्ष के दौरान पूर्व बैंक कर्मचारियों की मदद से अंजाम दिया गया। रिभव ऋषि, जो जून 2025 में बैंक से इस्तीफा दे चुके हैं, पर आरोप है कि उन्होंने कई शेल कंपनियों के जरिए सरकारी धन की हेराफेरी की। कुछ धनराशि उनके और उनकी पत्नी दिव्या अरोड़ा के खातों में भी ट्रांसफर की गई।
जांच में यह भी सामने आया कि मोहाली के होटल व्यवसायी और रियल एस्टेट डेवलपर विक्रम वाधवा ने भी बड़ी रकम अपने खातों में प्राप्त की और बाद में इसे प्रिस्मा रेजिडेंसी एलएलपी, किनस्पायर रियल्टी एलएलपी और मार्टेल बिल्डवेल एलएलपी जैसी कंपनियों में ट्रांसफर किया।
ईडी ने इन सभी कंपनियों के ठिकानों पर तलाशी लेकर रियल एस्टेट निवेश से जुड़े दस्तावेज जब्त किए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक वाधवा फिलहाल फरार हैं और घोटाले के सामने आने के बाद से उनका पता नहीं चल पाया है। जांच में चंडीगढ़ मेगा स्टोर नामक इकाई के बैंक खातों के माध्यम से भी धन की लेयरिंग और हेराफेरी के सबूत मिले हैं। इसके साझेदार मोहित गोयल के परिसरों पर भी तलाशी ली गई।
इसके अलावा मां वैभव लक्ष्मी इंटीरियर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों के ठिकानों पर भी छापे मारे गए, जहां से सरकारी खातों से सीधे धन प्राप्त होने और उसे आगे अन्य शेल कंपनियों में भेजने के प्रमाण मिले।
तलाशी के दौरान ईडी ने 90 से अधिक बैंक खातों को फ्रीज कर दिया और डिजिटल व दस्तावेजी रूप में कई अहम सबूत जब्त किए हैं। मामले में आगे की जांच जारी है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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