लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सियासी बहस गर्मा गई। समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य में स्वास्थ्य बजट का अधिकतम हिस्सा खर्च नहीं किया गया, जिसके चलते सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं का अभाव और डॉक्टरों की तैनाती में कमी बनी हुई है।
अतुल प्रधान ने कहा कि कागजों पर योजनाएं तो गिनी जा रही हैं, लेकिन आम मरीजों को जमीनी स्तर पर पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उनका यह भी कहना था कि प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचा अभी भी कमजोर है और जनता को समय पर इलाज और देखभाल नहीं मिल पा रही है।
इस पर सरकार की ओर से उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने जवाब देते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। मंत्री ने दावा किया कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए बड़े पैमाने पर मेडिकल कॉलेज, अस्पतालों का उन्नयन और नई सुविधाएं शुरू की गई हैं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में अभूतपूर्व निवेश किया गया है।
दोनों पक्षों के बीच विधानसभा में तीखी नोकझोंक के बाद सदन का माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया। विपक्ष लगातार बजट की वास्तविक उपयोगिता और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर सवाल उठाता रहा, जबकि सरकार उपलब्धियों का हवाला देती रही।

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