मुरादाबाद: ईरान-इजराइल तनाव पर पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन का बयान, अमेरिकी नीति और भारत की विदेश नीति पर उठाए सवाल
मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने ईरान-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को वैश्विक शक्ति संतुलन, तेल की राजनीति और अमेरिका की भूमिका से जोड़ते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं।
“अमेरिका दुनिया का सबसे ताकतवर गुंडा”
डॉ. हसन ने कहा कि अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा और ताकतवर गुंडा है। उनके मुताबिक, अमेरिका खुद तो परमाणु हथियार बनाता है, लेकिन दूसरे देशों को मिसाइल तक विकसित नहीं करने देता। उन्होंने कहा कि अगर दुनिया में शक्ति संतुलन स्थापित हो जाए तो किसी भी देश की मनमानी खत्म हो सकती है।
ईरान पर हमले को बताया बड़ी रणनीति का हिस्सा
उन्होंने कहा कि ईरान पर हमला भी इसी मानसिकता का हिस्सा है। दुनिया जानती है कि अमेरिका एक बड़ी ताकत है और ऐसे संघर्षों का अंजाम कितना खतरनाक हो सकता है। डॉ. हसन के अनुसार, यह केवल सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि वैश्विक नियंत्रण की रणनीति है।
पीएम मोदी की यात्रा पर सवाल
पूर्व सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इजराइल यात्रा को भी इस पूरे घटनाक्रम से जोड़ते हुए सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के इजराइल दौरे के 48 घंटे के भीतर ही ईरान पर हमले शुरू हो गए।
डॉ. हसन ने कहा, “प्रधानमंत्री ने इजराइल में कहा था कि भारत हर हाल में इजराइल के साथ है। अब उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि क्या मौजूदा हालात में भी भारत उसी रुख पर कायम है?”
भारत की विदेश नीति पर उठे सवाल
डॉ. हसन ने भारत की विदेश नीति को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “क्या हमारी विदेश नीति बदल चुकी है? क्या भारत अब फिलिस्तीन के साथ नहीं खड़ा है? यह स्थिति हैरान करने वाली है और सरकार को देश के सामने अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।”
“हम कठपुतली क्यों बनें?”
उन्होंने आगे कहा कि ऐसा लगता है कि कोई बड़ी रणनीति पहले से तैयार थी और उसी के तहत घटनाएं तेजी से घटीं। उन्होंने कहा, “हमें किसी के हाथों की कठपुतली नहीं बनना चाहिए। देश की इज्जत और सम्मान को सर्वोपरि रखना जरूरी है।”
तेल की राजनीति का आरोप
डॉ. हसन ने इस पूरे विवाद को तेल की राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि मिडिल ईस्ट में तेल के बड़े भंडार हैं और अमेरिका की नजर इन संसाधनों पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ईरान में अपनी पसंद की सरकार बनाकर वहां के तेल संसाधनों पर कब्जा करना चाहता है।
उन्होंने कहा, “यह लड़ाई असल में तेल की है। अमेरिका को पैसे की हवस है और वह इनडायरेक्ट तरीके से तेल के कुओं पर नियंत्रण चाहता है।”
वेनेजुएला का दिया उदाहरण
अपने तर्क को मजबूत करने के लिए उन्होंने वेनेजुएला का उदाहरण दिया और कहा कि वहां भी संसाधनों को लेकर दबाव बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि दुनिया के सबसे ताकतवर देश ने वहां के राष्ट्रपति को हटा दिया और आज तक उनका कोई पता नहीं है।
संतुलित विदेश नीति की वकालत
डॉ. हसन ने अंत में कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालात बेहद गंभीर हैं और ऐसे समय में भारत को संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति अपनानी चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत को किसी एक पक्ष के साथ खुलकर खड़े होने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
फिलहाल, उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है और यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बनता जा रहा है।
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लेखक के बारे में
अभिषेक भारद्वाज एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 11 वर्षों से मुरादाबाद मंडल की पत्रकारिता का व्यापक अनुभव है। वे मुरादाबाद के प्रतिष्ठित एसएस न्यूज़ चैनल में संपादकीय प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण पद पर कार्य कर चुके हैं। मुरादाबाद की राजनीतिक, सामाजिक और स्थानीय खबरों पर उनकी गहरी पकड़ है। वर्तमान में वे रॉयल बुलेटिन के मुरादाबाद जिला प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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