विहिप नेता को जेल भिजवाने वाली ADM ऋतु पूनिया पर गिरी गाज, शासन ने पद से हटाया
पीलीभीत। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के संगठन मंत्री प्रिंस गौड़ को जेल भेजने के मामले में अपर जिलाधिकारी (ADM) वित्त एवं राजस्व ऋतु पूनिया को उनके पद से हटा दिया गया है। शासन स्तर से की गई इस कार्रवाई के तहत, ऋतु पूनिया को लखनऊ मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है।
उनकी जगह, प्रसून द्विवेदी को जिले का नया ADM वित्त एवं राजस्व बनाया गया है। प्रसून द्विवेदी इससे पहले मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण में विशेष कार्याधिकारी (OSD) के पद पर तैनात थे।
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यह कार्रवाई विहिप नेता प्रिंस गौड़ को जेल भेजे जाने के बाद जिलेभर में फैले हिंदू संगठनों के कड़े विरोध के बाद हुई है।
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विवाद की जड़: विहिप नेता प्रिंस गौड़ ने शहर की एक निर्माणाधीन कॉलोनी में बनाई जा रही मजार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था।
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ADM पर आरोप: प्रिंस गौड़ ने ADM ऋतु पूनिया पर कॉलोनाइजर को संरक्षण देने और उनके पति के लिए ठेके दिलवाने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए बरेली मंडलायुक्त से शिकायत की थी।
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ADM की प्रतिक्रिया: शिकायत पर जब कमिश्नर ने ADM से जवाब मांगा, तो ऋतु पूनिया नाराज हो गईं। उन्होंने विहिप नेता प्रिंस गौड़ के खिलाफ रंगदारी और सरकारी कार्य में बाधा जैसी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज करवा दिया।
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गिरफ्तारी और विरोध: पुलिस ने 8 नवंबर को विहिप नेता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जिसके बाद जिलेभर के हिंदू संगठनों में गुस्सा फैल गया।
जेल में बिगड़ी तबीयत और जमानत
जेल भेजे जाने के तुरंत बाद, प्रिंस गौड़ की शनिवार रात अचानक तबीयत बिगड़ गई और उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराना पड़ा। विहिप के प्रांतीय पदाधिकारियों ने इस पूरी कार्रवाई को द्वेषपूर्ण और हिंदू नेता को नीचा दिखाने के उद्देश्य से की गई राजनीतिक कार्रवाई बताया था।
मंगलवार (11 नवंबर) को विहिप संगठन मंत्री प्रिंस गौड़ को सीजेएम कोर्ट से जमानत मिल गई। विवेचना के दौरान साक्ष्य के अभाव में कई गंभीर धाराओं को हटा दिया गया था, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें राहत दी।
विहिप नेता और ADM की सफाई
जेल से बाहर आने पर प्रिंस गौड़ ने कहा था कि निस्वार्थ सेवा का उन्हें यह परिणाम भुगतना पड़ा, और अधिकारियों की जो मंशा थी, वह पूरी हो गई।
वहीं, ADM ऋतु पूनिया ने खुद पर लगे आरोपों का खंडन करते हुए सफाई दी थी कि प्रिंस गौड़ फर्जी शिकायतों के माध्यम से मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर धन उगाही करने की कोशिश कर रहे थे, और उन पर लगाए गए आरोप झूठे थे।
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