गाजियाबाद: बढ़े हुए हाउस टैक्स पर भड़के व्यापारी; कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर नगर निगम के खिलाफ खोला मोर्चा

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार के नौ वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में जहाँ एक ओर विकास कार्यों का बखान किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर गाजियाबाद में हाउस टैक्स की बढ़ोतरी ने एक नया सियासी और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है। नगर निगम द्वारा टैक्स की दरों में किए गए इजाफे के विरोध में 'गाजियाबाद व्यापार मंडल' के बैनर तले बड़ी संख्या में व्यापारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया और बढ़ी हुई दरों को तत्काल वापस लेने की मांग उठाई।
जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे व्यापारियों ने नगर निगम प्रशासन और मुख्य नगर अधिकारी (MNA) के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी व्यापारियों का स्पष्ट आरोप है कि नगर निगम ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए बिना किसी ठोस जनसुनवाई या जनता की सहमति के हाउस टैक्स में भारी बढ़ोतरी कर दी है। व्यापारियों का कहना है कि इस फैसले से न केवल व्यापारिक वर्ग, बल्कि आम जनता पर भी अनावश्यक आर्थिक बोझ डाल दिया गया है, जो पूरी तरह से अनुचित और तर्कहीन है।
व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि मुख्य नगर अधिकारी ने जानबूझकर जनता की समस्याओं को दरकिनार कर टैक्स का बोझ थोपा है। व्यापारियों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि प्रशासन ने इस जनविरोधी फैसले को जल्द वापस नहीं लिया, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर पूरे शहर में बड़े स्तर पर आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
ये भी पढ़ें एनसीआर में मौसम ने ली करवट, हल्की बारिश के साथ पूरे सप्ताह छाए रहेंगे बादल, एक्यूआई में भी सुधार प्रदर्शन के बाद व्यापारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें टैक्स बढ़ोतरी को रद्द करने और भविष्य में ऐसी किसी भी वृद्धि से पहले व्यापारिक संगठनों के साथ संवाद करने की मांग की गई है। फिलहाल, इस प्रदर्शन के बाद नगर निगम और जिला प्रशासन के बीच हलचल तेज हो गई है।
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