मुजफ्फरनगर में गरीबी के अंतिम संस्कार में शालू सैनी ने पेश की मिसाल, निभाया रिश्ते का फर्ज
एक गरीबी परिवार के लिए आर्थिक तंगी में बनी फरिश्ता

मुजफ्फरनगर। कहते हैं कि इंसान की असली पहचान उसके कठिन समय में किए गए कार्यों से होती है। मुजफ्फरनगर में मानवता की एक ऐसी ही मिसाल सामने आई है, जहाँ एक लाचार परिवार के लिए 'क्रांतिकारी शालू सैनी' फरिश्ता बनकर सामने आईं। आर्थिक तंगी से जूझ रहे एक परिवार के सामने उस समय पहाड़ टूट पड़ा जब उनके परिजन का निधन हो गया। गरीबी के कारण परिवार अंतिम संस्कार की व्यवस्था करने में पूरी तरह असमर्थ था।
जानकारी के अनुसार, मृतक मूल रूप से छत्तीसगढ़ का रहने वाला था। वह ट्रेन से यात्रा कर रहा था और खिड़की के पास बैठा था। दुर्भाग्यवश, सफर के दौरान वह हादसे का शिकार हो गया और काल के गाल में समा गया। परिवार की स्थिति ऐसी थी कि वे अपने प्रियजन को अंतिम विदाई देने की स्थिति में भी नहीं थे।
शालू ने अपने कंधों पर ली जिम्मेदारी
जैसे ही इस दर्दनाक स्थिति की जानकारी क्रांतिकारी शालू सैनी को मिली, उन्होंने बिना देर किए परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। उन्होंने खुद को परिवार की 'बड़ी बहन' मानते हुए हिंदू रीति-रिवाजों के साथ मृतक के अंतिम संस्कार की सभी व्यवस्थाएं स्वयं कराईं। श्मशान घाट पर पूरी विधि-विधान के साथ दिवंगत आत्मा को विदाई दी गई। इस दौरान पूरा माहौल भावुक हो उठा और उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं।
सुरक्षित यात्रा की अपील
शालू सैनी ने भावुक होते हुए कहा, "इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। कठिन समय में किसी का हाथ थाम लेना ही सच्ची सेवा है।" साथ ही, उन्होंने सभी देशवासियों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा, "ट्रेन की खिड़की पर बैठकर सफर करना जानलेवा हो सकता है। आप घर से निकलते हैं, तो पीछे आपका कोई इंतजार कर रहा होता है, इसलिए सुरक्षा को प्राथमिकता दें।"
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लेखक के बारे में
ओ.पी. पाल पिछले साढ़े तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय एक प्रतिष्ठित नाम हैं। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (P.I.B. Accredited) वरिष्ठ पत्रकार श्री पाल ने लंबे समय तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के साथ-साथ गृह, रक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की नेशनल ब्यूरो स्तर पर रिपोर्टिंग की है।
अमर उजाला और दैनिक जागरण से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री पाल ने 'शाह टाइम्स' में न्यूज़ एडिटर और 'हरिभूमि' (दिल्ली) में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं। राजनीति विज्ञान और कृषि के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे 'साहित्य रत्न' से भी विभूषित हैं। वर्तमान में वे एक स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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