कोतवाल का फोटो लगाकर साइबर ठगी करने का प्रयास, पत्रकार से मांगे पैसे
खतौली। साईबर क्राइम पुलिस की लाख कोशिशों के बावजूद ऑन लाईन ठगी करने वाले बदमाशों की गतिविधियों पर अंकुश लगना मुश्किल हो रहा है। हौसला बुलन्द ठगों ने ज़िले में तैनात एक कोतवाल की फोटो व्हाट्स ऐप डीपी पर लगाकर इनके परिचितों को अपनी ठगी का शिकार बनाने का प्रयास किया। पता चलने पर कोतवाल […]
खतौली। साईबर क्राइम पुलिस की लाख कोशिशों के बावजूद ऑन लाईन ठगी करने वाले बदमाशों की गतिविधियों पर अंकुश लगना मुश्किल हो रहा है। हौसला बुलन्द ठगों ने ज़िले में तैनात एक कोतवाल की फोटो व्हाट्स ऐप डीपी पर लगाकर इनके परिचितों को अपनी ठगी का शिकार बनाने का प्रयास किया।
पता चलने पर कोतवाल साहब को आनन फानन ऑनलाइन होकर अपने परिचितों को ठग के झांसे में ना आने के लिए होशियार करना पड़ा। जानकारी के अनुसार ऑनलाइन ठगी करने वाले बदमाशों का आतंक कम होने के बजाए दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा रहे। बीते दिनों साइबर ठगों ने ज़िले के कद्दावर नेता हरेंद्र मलिक की फेसबुक आईडी हैक करके उनके परिचितों को ठगने का प्रयास किया था।
साइबर ठगों द्वारा ठगी करने की वारदात की खबरें प्रतिदिन समाचार पत्रों की सुर्खियों में रहती है। साईबर क्राइम पुलिस द्वारा शिकायत मिलने पर साईबर ठगों के शिकार बनने वालों के रुपए वापस दिलाए जाने का काम भी खूब किया जा रहा है। बावजूद इसके ठगों के हौसले पस्त होने के बजाए बुलन्द होते जा रहे है।
बताया गया जनपद के खतौली थाने में तैनात रहे एक प्रभारी निरीक्षक की वर्तमान में तैनाती थाने में ना होकर किसी अन्य सैल में चल रही है। बताया गया पिछले दिनों एक ठग ने कोतवाल का फोटो व्हाट्सऐप डीपी पर लगाकर इनके परिचितों के साथ हाय हैलो और परिवार में सब लोग कैसे है से चैटिंग की शुरुआत करके कुछ खास ज़रूरत बता एक दो दिन में लौटाने के वादे पर कुछ रुपए उधार देने की डिमांड कर दी।
ठग के झांसे में कोतवाल साहब के कितने परिचित फंसे होगे इसका तो पता नहीं, लेकिन कुछ घंटे बाद ही कोतवाल साहब को व्हाट्सऐप पर ऑनलाइन आकर अपने परिचितों को ठग के झांसे में ना आने के लिए आगाह करना पड़ गया।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
पत्रकारिता के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने वर्ष 2010 में नोएडा से रॉयल बुलेटिन के प्रिंट संस्करण का सफल विस्तार किया। समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य को समझते हुए, उनके नेतृत्व में यह संस्थान आज एक मजबूत और प्रभावशाली डिजिटल समाचार मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।
वर्तमान में रॉयल बुलेटिन की पहुँच न्यूज़ पोर्टल, फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सहित सभी प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों पाठकों तक है। प्रिंट और डिजिटल मीडिया के स्वामी एवं संपादक के रूप में अनुभव, सत्यनिष्ठा और जन-सरोकार उनकी पत्रकारिता की मूल आधारशिला रहे हैं।

टिप्पणियां